Ad

Terrace Garden

यूटूब की मदद से बागवानी सिखा रही माधवी को मिल चुका है नेशनल लेवल का पुरस्कार

यूटूब की मदद से बागवानी सिखा रही माधवी को मिल चुका है नेशनल लेवल का पुरस्कार

अपनी उम्र के युवा दिनों से ही पादप विज्ञान(Plant Science) और वनस्पति विज्ञान(Botany) में रुचि रखने वाली एक ग्रहणी, आज यूट्यूब पर एक चैनल के माध्यम से अपनी जैसे ही दूसरी गृहणियों को भी, जैविक खेती की मदद से प्राकृतिक उर्वरकों का इस्तेमाल कर छत पर बागवानी यानी रूफटॉपबागवानी (Roof / Terrace gardening) के बारे में जानकारियां उपलब्ध करवा रही है। यूट्यूब पर माधवी (Mrs. Madhavi Guttikonda) के 'मैडगार्डनर' (MAD GARDENER) नाम के चैनल पर लगभग 5 लाख से अधिक सब्सक्राइबर (subscriber) हैं

Mrs. Madhavi Guttikonda - Youtube Chanel - MAD GARDENER

अपने घर की छत पर ही फूल और फलों से शुरुआत करने वाली माधवी पिछले 10 सालों से जैविक खेती की मदद से सब्जियां उगा रही है। इस प्रकार की जैविक सब्जी उत्पादन की शुरूआत माधवी ने 25 वर्ष की उम्र में अपनी शादी के बाद की थी।

ये भी पढ़ें: ओडिशा के एक रेलकर्मी बने किसान, केरल में ढाई एकड़ में करते हैं जैविक खेती 

पुराने दिनों को याद कर माधवी बताती हैं कि शुरुआती दिनों में वह एक किराए के एक अपार्टमेंट में रहते थे और वहीं पर कुछ अलग-अलग प्रकार के अच्छे दिखने वाले फूलों के पौधों की बागवानी करना शुरू किया था, 

इस समय माधवी का फोकस बागवानी से पैसा कमाना नहीं था बल्कि केवल अपने शौक के खातिर ही फूलों के पौधे लगाए थे। माधवी बताती है कि आज उनका फोकस खाने वाली सब्जियों के उत्पादन की तरफ है और उनके घर में इस्तेमाल होने वाली एक सप्ताह की सब्जियों में से लगभग पांच दिन की सब्जी उनके खुद के उगाए हुए रूफटॉप गार्डन से ही इस्तेमाल की जाती है।

ये भी पढ़ें: हरी सब्जियां आसानी से किचन गार्डन मे उगाएं : करेला, भिंडी, घीया, तोरी, टिंडा, लोबिया, ककड़ी

अपने बेटे और बेटी के कहने पर 2018 में यूट्यूब चैनल की शुरुआत करने वाली माधवी को शुरुआत में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। भारत के अधिकतर कृषि उत्पादन क्षेत्र में हिंदी भाषी लोग होने के बावजूद इन्हें हिंदी नही आने के कारण, तेलुगु भाषा में बागवानी का यह चैनल शुरू करना पड़ा। 

लेकिन पहले ही महीने में उन्हें काफी सफलता मिली और पिछले कुछ सालों से कमाए गए अनुभव को वह आज भी सोशल मीडिया और यूट्यूब की मदद से आसानी से लोगों तक पहुंचाने में सफल रही हैं। 

माधवी वर्तमान में कम समय में पक कर तैयार होने वाली मौसमी सब्जियों का उत्पादन करना पसंद करती है, जिनमें टमाटर, मिर्ची और लौकी को अच्छी सब्जी मानती है। इसके अलावा वह ड्रैगन फ्रूट, पपीता और नींबू तथा केले जैसे छोटे पौधे भी अपनी छत पर बने हुए 18 स्क्वायर फीट के गार्डन में लगाकर परीक्षण कर चुकी हैं।

ये भी पढ़ें: इस माह नींबू, लीची, पपीता का ऐसे रखें ध्यान 

माधवी का मानना है कि खेती और किसानी में यदि बेहतरीन तरीके की वैज्ञानिक तकनीक और नए विचारों वाली विधियों का इस्तेमाल किया जाए तो खेती उतनी मुश्किल नहीं होती, जितनी दिखाई देती है। 

पिछले कुछ समय से लोगों से हुए जुड़ाव को लेकर माधवी कहती हैं कि वह जब भी किसी नई प्रकार की सब्जी के उत्पादन के बारे में सोचती है तो वीडियो बनाने से पहले वह किसी भी प्रकार का रिसर्च नहीं करती और अपने चैनल के माध्यम से लोगों से ही उस सब्जी के लिए नए इनोवेटिव आईडिया लेने की कोशिश करती हैं। 

यदि कोई अनुभवी किसान माधवी को अपनी राय देते हैं, तो वह स्वयं उनसे पूरी बात कर जानकारी प्राप्त करती हैं और फिर उसे अपने अगले वीडियो में किसान भाइयों तक शेयर करती हैं। 

कंपोस्ट खाद के अलग-अलग बॉक्स में अपनी सब्जियों उगाने को प्राथमिकता देने वाली माधवी बताती हैं कि यदि मिट्टी का पूरा ध्यान रखा जाए और बीज को पूरे उपचार के बाद इस्तेमाल किया जाए, तो पौधे की उत्पादकता बढ़ाने के अलावा उसमें लगने वाले हानिकारक कीटनाशक और दूसरे कई प्रकार के मक्खियों से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

माधवी बताती है कि यदि सही समय पर उनके पास अच्छा विकल्प होता तो वह अवश्य एक बड़ी किसान के रूप में काम करना पसंद करती, लेकिन शहर में रहने की वजह से और जमीन ना होने के कारण केवल रूफटॉप बागवानी की मदद से ही वह खेती में अपने पैशन को बरकरार बनाए रख सकती थी। 

माधवी ने बताया कि उनके यूट्यूब चैनल 'मैड गार्डनर' की मदद से उन्हें महीने में लगभग एक लाख रुपए तक का रेवेन्यू प्राप्त हो जाता है। पिछले कुछ महीनों से से माधवी अपने यूट्यूब से प्राप्त होने वाली आय का 50% हिस्सा शहर के ही गरीब बच्चों को खाना खिलाने के लिए करती है।

ये भी पढ़ें: सफलता की कहानी:सूनी सड़क पर महिलाओं ने गुलजार किया सब्जी बाजार 

कृषि से जुड़ी एक मैगजीन के द्वारा साल 2021 में माधवी को टेरेस बागबानी के लिए राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार दिया गया था, इन लम्हों को याद करते हुए माधवी कहती है कि भारत के उपराष्ट्रपति से मिलने वाले इस पुरुस्कार के बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था, 

लेकिन कृषि में अपने पैशन की वजह से आज उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। माधवी यहां तक कहती है कि कई बार तो वह हैरान हो जाती है जब 10 साल से छोटे बच्चे भी उनके वीडियो देख, कृषि में अपना पैशन विकसित कर पा रहे हैं।

भविष्य की नीतियों के बारे में जब माधवी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह जल्द ही आसपास के क्षेत्र में ही खुद की जमीन खरीद कर स्वयं के इस्तेमाल में आने वाले खाने का उत्पादन करना चाहती है और बड़ी संस्थाओं के साथ मिलकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले नई तकनीकों को किसान भाइयों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयासरत है।

ये भी पढ़ें: जैविक खेती पर इस संस्थान में मिलता है मुफ्त प्रशिक्षण, घर बैठे शुरू हो जाती है कमाई 

माधवी अपने चैनल के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलाकर उनकी आय बढ़ाने के अलावा कृषि क्षेत्र में नए इनोवेटिव विचार के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, भले ही बड़े किसानों की तरह माधवी लाखों-करोड़ों रुपए का मुनाफा कर दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत ना बन पाए, लेकिन अपने अनुभव का इस्तेमाल कर कई किसानों को इस लायक बनाने में सफल रही है। 

आशा करते हैं कि हमारे किसान भाई भी उनके इस चैनल की मदद से छत पर की जाने वाली बागबानी के बारे में कुछ सीख कर अपने घर में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों की जैविक खेती जरूर कर पाएंगे और भविष्य में बड़ी संस्थाओं से जुड़कर नई तकनीकों का इस्तेमाल कर कृषि व्यवसाय में भी मुनाफा कमा पाएंगे।

किसान अपनी छत पर इन महंगी सब्जियों को इस माध्यम से उगाऐं

किसान अपनी छत पर इन महंगी सब्जियों को इस माध्यम से उगाऐं

शिमला मिर्च की खेती भी बिल्कुल उसी तरह कर सकते हैं, जैसे बैंगन की करते हैं। हालांकि, इसमें धूप का और पानी का खास ध्यान रखना पड़ता है। प्रयास करें कि शिमला मिर्च के पौधों पर प्रत्यक्ष तौर पर धूप ना पड़े। बाजार में कुछ दिन पूर्व तक टमाटर की कीमत 350 रुपए प्रतिकिलो थी। दरअसल, सरकार के हस्तक्षेप के उपरांत इनके भाव अब 70 से 80 रुपए किलो तक आ गए हैं। परंतु, क्या आपको जानकारी है, कि बाजार के अंदर विभिन्न ऐसी सब्जियां हैं, जो आज भी 150 के पार चल रही हैं। इन सब्जियों में शिमला मिर्च, बैगन और धनिया शम्मिलित हैं। आइए आपको जानकारी दे दें कि कैसे आप इन सब्जियों को अपनी छत पर सहजता से उगा सकते हैं।

गमले के अंदर बैंगन की खेती

बैंगन को छत पर उगाना सबसे सुगम होता है। बाजार में इसके पौधे मिलते हैं, जिन्हें लाकर आप किसी भी गमले में इसको उगा सकते हैं। इसकी संपूर्ण प्रक्रिया के विषय में बात की जाए तो सबसे पहले आपको एक गमला लेना पड़ेगा। जो थोड़ा बड़ा हो उसके बाद उसमें मिट्टी और जैविक खाद मिला लें। जब इस प्रकार से गमला तैयार हो जाए तो नर्सरी से लाए हुए बैंगन के पौधों की इनमें रोपाई करें। एक गमले में आपको एक से ज्यादा पौधा नहीं रोपना चाहिए। ऐसे करके आप छत पर पांच से सात गमलों में बैंगन का उत्पादन कर सकते हैं। ये पौधे दो महीनों के अंतर्गत बैंगन देने लगेंगे। ये भी पढ़े: सफेद बैंगन की खेती से किसानों को अच्छा-खासा मुनाफा मिलता है

गमले के अंदर शिमला मिर्च की खेती

शिमला मिर्च की खेती भी बिल्कुल वैसे ही की जा सकती है, जैसे कि बैंगन की करते हैं। हालांकि, इसमें धूप का और पानी का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। प्रयास करें कि शिमला मिर्च के पौधों पर प्रत्यक्ष तौर पर धूप ना पड़े। यदि ऐसा हुआ तो पौधा सूख सकता है। इसी प्रकार से आप हरी मिर्च की भी खेती सहजता से कर सकते हैं। यदि आपका छत बड़ा है, तो आप उस पर बहुत सारे गमले रख के एक छोटा सा वेजिटेबल गार्डेन तैयार कर सकते हैं, जिसमें आप प्रतिदिन बगैर रसायन वाली ताजी-ताजी सब्जियां उगा सकते हैं।

गमले के अंदर धनिया की खेती

संभवतः धनिया की खेती सबसे आसान ढ़ंग से की जाती है। हालांकि, इसके लिए आपको गमला नहीं बल्कि कोई चौड़ी वस्तु जैसे कोई बड़ा सा गहरा ट्रे लेना पड़ेगा। इस ट्रे में पहले आप जैविक खाद और मृदा डाल दें, उसके उपरांत इसमें बाजार से लाए धनिया के बीज छींट दें। फिर उसमें पानी का मध्यम छिड़काव कर दें। दस से बीस दिनों के समयांतराल पर धनिया के पौधे तैयार हो जाएंगे, एक महीने के पश्चात आप इनकी पत्तियों का इस्तेमाल कर पाएंगे।
किसान भाई किचन गार्डनिंग के माध्यम से सब्जियां उगाकर काफी खर्च से बच सकते हैं

किसान भाई किचन गार्डनिंग के माध्यम से सब्जियां उगाकर काफी खर्च से बच सकते हैं

किचन गार्डनिंग के माध्यम से आप भी घर में ही सब्जियों को उगा सकते हैं। यह सब्जी शुद्ध होंगी साथ ही बाजार से इन्हें खरीदने का झंझट भी समाप्त हो जाएगा। महंगाई के दौर में आप घर में ही सब्जियों की पैदावार कर सकते हैं, जिससे आप काफी रुपये बचा सकते हैं। ये सब्जियां घर में थोड़ी जगह में ही उग जाती हैं, जिसमें आपकी ज्यादा लागत भी नहीं आती है। विशेषज्ञों की मानें तो बालकनी में सब्जियां पैदा करने के दौरान आपको कुछ विशेष बातों का ख्याल रखना होता है, जिससे कि आप कम लागत में शानदार पैदावार अर्जित कर सकते हैं। आपको आसमान में पहुंचे टमाटर के भाव तो याद ही होंगे, इसी प्रकार की परेशानियों से संरक्षण के लिए आप किचन गार्डनिंग की मदद ले सकते हैं। इसमें आप टमाटर, मिर्च, भिंडी अथवा धनिया के अतिरिक्त बहुत सारी और सब्जियां भी उगा सकते हैं। इसके लिए मिट्टी से भरे कुछ गमले एवं धूप जरूरी है।

किसान भाई बड़े गमलों के अंदर ही रोपाई करें

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि अधिकांश सभी के घर की बालकनी में धूप आती है। ऐसी स्थिति में बालकनी में सब्जियां उगाना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इससे आपके घर में सदैव हरियाली बनी रहेगी। पैसे बचेंगे एवं शुद्ध सब्जियां आपको अपने घर में मिल जाएंगी। किचन गार्डनिंग के दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखें कि सब्जियों के पौधों की रोपाई बड़े गमलों में की जाए, जिससे जड़ों को फैलने का पर्याप्त अवसर मिलता है।

ये भी पढ़ें:
गर्मियों की हरी सब्जियां आसानी से किचन गार्डन मे उगाएं : करेला, भिंडी, घीया, तोरी, टिंडा, लोबिया, ककड़ी

किसान भाई मौसम का विशेष ख्याल रखें

बतादें कि इसके अतिरिक्त बड़े गमले में पौधे मजबूत बनेंगे और पौधों में फल भी अच्छी मात्रा में आएंगे। विशेषज्ञ कहते हैं, कि किचन गार्डनिंग में भी मौसम का ध्यान रखना काफी आवश्यक है। बिना मौसम के लगाई गई सब्जियों से फल हांसिल कर पाना काफी मुश्किल होता है। बालकनी में खेती कर आप महीने के हजारों रुपये आसानी से बचा सकते हैं। आप स्वयं ही घर में टमाटर, भिन्डी, धनिया और मिर्च उगाकर उपयोग में ले सकते हैं। किसानों को रसोई बागवानी के विषय में जानकारी होनी काफी आवश्यक है। क्योंकि किचन गार्डनिंग के दौरान थोड़ा बहुत मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को बेहद आरंभिक तोर पर किचन गार्डनिंग का उपयोग करना चाहिए। मौसम की वजह से किसानों को टमाटर की काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ी।
शहर में रहने वाले लोगों के लिए आयी, बिहार सरकार की ‘छत पर बाग़बानी योजना’, आप भी उठा सकते हैं फ़ायदा

शहर में रहने वाले लोगों के लिए आयी, बिहार सरकार की ‘छत पर बाग़बानी योजना’, आप भी उठा सकते हैं फ़ायदा

बढ़ते शहरीकरण और जमीन की उर्वरा क्षमता में कमी आने की वजह से पिछले 4 से 5 वर्षों में रूफटॉप गार्डन (Roof / Terrace gardening) यानी छत पर बागवानी विधि का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है। इसी बढ़ते हुए प्रभाव को मध्यनजर रखते हुए बिहार सरकार के बागवानी विभाग ने भी बिहार के शहरों में रहने वाले लोगों के लिए 'छत पर बागवानी योजना' नाम से नई परियोजना शुरू कर शहरों में बागबानी की उपज को बढ़ाने के लिए कमर कस ली है।

क्या है रूफटॉप गार्डन ?

रूफटॉप गार्डन मुख्यतः बड़े अपार्टमेंट और शहरों में बने घरों की छत पर बने हुए गार्डन होते हैं, जो सामन्यतः डेकोरेशन में इस्तेमाल होने के अलावा घर में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। कई प्रकार के हाइड्रोलॉजिकल फायदे (Hydrological benefit) होने के अलावा, रूफटॉप गार्डन की मदद से घर के तापमान को भी नियंत्रित किया जा सकता है तथा छत पर होने वाली बारिश के पानी (Rain Water Harvesting) का भी बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।

क्या है बिहार सरकार की 'छत पर बागवानी योजना' का मुख्य उद्देश्य ?

कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले बागवानी विभाग की वेबसाइट के अनुसार इस योजना को मुख्यतः शहरी क्षेत्रों में बने घरों की छत पर फूल और फल तथा सब्जियां उगा कर दैनिक जीवन में इस्तेमाल करने योग्य बनाना है। महाराष्ट्र, गुजरात तथा कर्नाटक जैसे राज्यों में छत पर बागवानी से जुड़ी योजनाओं की सफलता के बाद बिहार सरकार का यह प्रयास 'आत्मनिर्भर भारत' की राह पर एक प्रबल कदम है। वर्तमान में इस योजना में बिहार के 4 जिले पटना, गया तथा मुजफ्फरपुर और भागलपुर को शामिल किया गया है। पटना के पटना सदर और फुलवारी तथा गया के बोधगया तथा मानपुर प्रखंडो में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे मुजफ्फरपुर के मुशहरी और भागलपुर के जगदीशपुर तथा नाथनगर जैसे प्रखंडों के निवासियों के लिए भी उपलब्ध करवाया जाएगा।


ये भी पढ़ें: बिहार सरकार की किसानों को सौगात, अब किसान इन चीजों की खेती कर हो जाएंगे मालामाल

क्या है योजना की पात्रता ?

बिहार सरकार की इस योजना का फायदा उठाने के लिए केवल वही लोग पात्र है, जिनके पास शहरी इलाकों में अपना खुद का घर हो या फिर वो किसी प्राइवेट अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रहते हैं या उनका खुद का फ्लैट हो। यदि किसी व्यक्ति के पास स्वयं का मकान है तो छत पर 300 स्क्वायर फीट की खाली जगह होनी चाहिए, साथ ही यह क्षेत्र किसी कानूनी लड़ाई में सम्मिलित नहीं होना चाहिए। यदि आवेदक अपार्टमेंट के निवासी है तो उन्हें अपार्टमेंट की पंजीकृत सोसाइटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (No objection Certificate) लेने की आवश्यकता होगी। यदि आपके पास अपना खुद का मकान है, तो एक इकाई में अधिकतम 75% तक क्षेत्रफल में ही योजना का लाभ दिया जाएगा। पिछड़ी जातियों का खासतौर पर ध्यान रखते हुए किसी भी जिले में योजना के लिए प्राप्त सभी आवेदनों में से 16% आवेदन अनुसूचित जाति और 1% अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इसके अलावा बिहार सरकार के कृषि और बागवानी में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट के तहत, कुल भागीदारी में से 30% आवेदन महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे।


ये भी पढ़ें: अब सरकार बागवानी फसलों के लिए देगी 50% तक की सब्सिडी, जानिए संपूर्ण ब्यौरा

योजना का लाभ उठाने की संपूर्ण प्रक्रिया :

ऊपर बताए गए चार जिलों में रहने वाले आवेदकों को सबसे पहले उद्यान निदेशालय की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। नीचे दिए गये लिंक की मदद से आप सीधे ही आवेदन कर सकते हैं :- यहाँ क्लिक कर सीधे कर सकते हैं आवेदन योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोगों को ध्यान रखना होगा कि संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन ही संपादित होगी और इस प्रक्रिया में आवेदक को नाम और जाति संबंधित सभी जानकारियां देने के अलावा, योजना के कार्यान्वयन करने वाली कंपनी की जानकारी भी उपलब्ध करवानी होगी। यदि कोई भी व्यक्ति इस योजना के लिए अलग से पैसे की मांग करता है तो उसकी शिकायत वेबसाइट पर ही उपलब्ध शिकायत निवारण पोर्टल (Grievance redressal portal) पर कर सकते हैं। एक बार आवेदन जमा हो जाने के बाद आपको एक रसीद दी जाएगी, इस प्राप्त रसीद में एक बैंक खाता संख्या और अन्य प्रकार के विवरण दिए जाएंगे। योजना का लाभ प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों को दिए गए बैंक खाते में 25000 रुपए की एकमुश्त राशि जमा करवानी होगी। इस बात का ध्यान रखें कि आगे की संपूर्ण प्रक्रिया इस राशि के जमा होने के बाद ही हो पाएगी। यदि कोई व्यक्ति अपने घर की छत पर इस योजना का फायदा उठाना चाहता है तो वह अधिकतम 2 इकाइयों के लिए आवेदन कर सकता है और एक अपार्टमेंट या एक सोसायटी में रहने वाले लोग अधिकतम 5 इकाइयों का आवेदन कर सकते हैं।


ये भी पढ़ें: यूटूब की मदद से बागवानी सिखा रही माधवी को मिल चुका है नेशनल लेवल का पुरस्कार

एक इकाई योजना में निम्न उपकरणों और सुविधाओं को शामिल किया गया है :

  • जैविक बाग (organic garden) बनाने के लिए 4 किट
  • ट्रे (Tray) के साथ आने वाली प्लास्टिक की पीएसटी
  • 10 फ्रूट बैग (Fruit Bag)
  • 10 फ्रूट प्लांट्स (Fruit Plants)
  • सैपलिंग (sapling) में इस्तेमाल आने वाली 3 ट्रे
  • हाथ से इस्तेमाल किया जाने वाला एक स्प्रे
  • खुदाई और निराई गुड़ाई करने के लिए 2 खुरपी
इसके अलावा एक बार बागान बनने के बाद कृषि से जुड़े विशेषज्ञों की जानकारियां और ट्रेनिंग जैसी खास सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाएगी। आशा करते हैं कि Merikheti.com के द्वारा उपलब्ध करवाई गई यह जानकारी, 'छत पर बागवानी' करने के विषय में इच्छुक व्यक्तियों को पसंद आई होगी और खास तौर पर बिहार के निवासी, सरकार की इस स्कीम का फायदा उठाकर आने वाले समय में अच्छा मुनाफा कमाने के साथ ही जैविक सब्जियों का इस्तेमाल भी कर पाएंगे।